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जानिए क्यों धन-लक्ष्मी किसी के पास नहीं रुकती

ये तो सभी जानते है धन-लक्ष्मी कभी भी किसी एक के पास नहीं रहती एक हाथ से दूसरे हाथ और उसके अगले ही पल किसी और तीसरे के हाथ में पहुंच जाती है। इसीलिए ये कहना गलत नहीं होगा लक्ष्मी चंचल और अस्थिर होती है।

लक्ष्मी को स्थिर कर पाना किसी के वस में नहीं । रातो रात ढेर सारी धन-सम्पदा का मालिक भी कभी कभी सुबह कर्जदार बन जाता है। ये ही लक्ष्मी की चंचलता होती है।

पर क्या आपने ये सोचा हे आखिर ऐसा क्यों होता है ? क्यों लक्ष्मी स्थिर नहीं होती ? क्यों अंदर ही अंदर भय बना रहता है लक्ष्मी के चले जाने का ! चलिए हम बताते है-

दरअसल उसके पीछे स्वयं खुद मनुष्य का पुरुषार्थ है। एक तो हम अपने पुरुषार्थ के लिए धन-लक्ष्मी अर्जित करते है, और दूसरा हम अपने पुरुषार्थ के लिए उसे खर्च करते है। और ये ही कारण बन जाता है लक्ष्मी के अस्थिर होने का क्योकि जब तक हम कुछ पाएंगे नहीं तब तक हम कुछ खर्च कैसे करेंगे, बस इसी चक्र में हम सारी उम्र घूमते रहते है।

वैसे लक्ष्मी की चंचलता और अस्थिरता के कारण ही मनुष्य गतिशील और परिश्रमिक होता है। उसको कही न कही ये आभास होता रहता है कि में कभी भी लक्ष्मी को अर्जित और व्यय कर सकता हूँ।
मतलब लक्ष्मी का चंचल और अस्थिर रहना ही मनुष्य को क्रियाशील,गतिशील और सांसारिक जीवन से सक्रीय रखता है।

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